शनिवार, 15 अगस्त 2009

नदी में ध्वजारोहण

देश के क्रॉतिकारी भले आज हमरे बीच ना हो, लेकिन इनकी परंपरा आज भी जीवित है। देश में जज्बा जगाने के लिये कॉतिकारी जिस तरह से अंग्रजों से बगावत करके राष्टध्वज रोहण किया करते थे। ठीक उसी तरह अब भी रीवा में कुछ देशभक्त नदी के बीच जाकर नाव में ध्वजारोहण करते है और मुश्किल से मिली आजादी के महत्व को बताते है। यै मेरे वतन के लोगों जरा ऑख में भर लो पानी.. जो शहीद हुये है उनकी जरा यदा करो कुर्वानी... देश की आजादी का सपना सजोये कॉतिकारी भले ही अब आजाद भारत देखने के लिये ना हो, लेकिन उनकी कुर्बनी आज भी याद की जाती है। जी हॉ रीवा मे शहीदों की इसी कुर्वानी को तरोतजा करने के लिये बीहर बिछिया नदी के राजघाट तट पर क्रॉतिकारी ठंग से ध्वाजरोहण किया जाता है। यह अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही वर्षो पुरानी परंपरा है और इसे आज भी कायम रखा गया है। नदी मे ध्वाजारोहण करने से युवाओ मे उत्साह और देश के लिये कॉति करने का जज्बा बनता है। इनकी रोम-रोम में भारत माता के लिये त्याग और बलिदान की भावना समा जाती है। यही वजह है कि हर हिन्दुस्तानी चाहता है कि देश के झंडा की आन बान सदैव बनी रहे। ध्वाजारोहण करने के साथ ही ये देशभक्त आजादी के महत्व को लोगो तक पहुंचाते है और देश की मिट्टी का कर्ज अदा करने की सीख देते है। इससे देश के लिये मर मिटने का आगाज हो रहा है वहीं क्रॉतिकारियों की कुर्वानी तरोतजा हो रही है।