रविवार, 9 अगस्त 2009

बीस साल बाद भी नही मिली मान्यता

बीस साल बीत जाने के बाद भी आयुर्वेद महाविद्यालय रीवा में संचालित बी.ए.एम.एस कोर्स को मान्यता नही मिली है। साथ ही पिछले दो वर्षो से एडमीशन भी बंद कर दिया गया है। इससे लाखों रुपये खर्च कर बी.ए.एम.एस. और एम.डी. की डिग्री हासिल करने वाले छात्रों का भविष्य अधर मे लटक गया है। इसी के चलते लामबंद होकर सभी छात्र हडताल पर चले गये है और सरकार को चेताने के लिये सदबुद्धी यज्ञ भी किया। हवन कुंड है सजो-समान और पंडित-पुजारी भी है.. यह देखकर सहज समझा जा सकता है कि यह किसी यज्ञ की तैयारी है। मगर यह किसी धार्मिक अनुष्ठान के लिये यज्ञ नही किया जा रहा है बल्कि डॉक्टर की ड्रिग्री हासिल करने वाले बी.ए.एम.एस. और एम.डी. के छात्र कर रहे है। वर्ष 1987 में शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में बैचलर ऑफ आयुर्वेद मार्डन मेडिसिन एण्ड सर्जरी डिग्री के स्थान पर आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) कोर्स शुरु किया गया। लेकिन सी.सी.आई.एम. ने इसे सेडयूल-2 मे नहीं रखा। जिससे डिग्री धारी छात्र प्रदेश के बाहर किसी भी पद के लिये मान्य नही है। बी.ए.एम.एस. और एम.डी. की डिग्री हासिल करने के बाद भी इन छात्रों को रोजगार नही मिल रहा है। साथ ही कालेज मे एडमीशन भी बंद कर दिया गया है इससे सैकडो छात्रों का भविष्य अधर मे लटक गया है। पिछले दो सालो से मेडिकल छात्रों का शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय मे एडमीशन नही हो रहा है और इस बार भी होने के कोई आसार नजर नही आ रहे है। ऐसे अपने भविष्य से चिंतित मे छात्र लामबंद हो गये है और हर हाल में कॉलेज की मान्यता चाहते है। पिछले एक सप्ताह से इनकी हडताल चल रही है और अब सरकार को बुद्धी दिलाने के लिये यज्ञ भी कर डाला। इस यज्ञ से आयुर्वेद के जनक धनवंतरी भगवान खुश होगे और केन्द्रीय चिकित्सा शिक्षा गुलामनवी आजाद और अनूप मिश्रा को बृद्धी प्रदान करेगें। बी.ए.एम.एस. और एम.डी. की डिग्री हासिल करने के लिये छात्रों ने लाखों रुपये खर्ज किये। लेकिन सी.सी.आई.एम की नही मिली डिग्री को मान्यता और पिछले दो सालो से एडमीशन भी बंद हो गये। कॉलेज प्रबंधन सेन्ट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सी.सी.आई.एम.) के मान्यता की शर्त पूरी नही कर पा रहा है जिसके चलते यह परेशानी खडी हुई है। प्रदेश के पॉच आयुर्वेद कालेजों की मान्यता अधर में लटक गयी है.. इसमें रीवा भी सामिल है। वर्ष 2005 में प्रदेश के विभिन्न आयुर्वेद कॉलेज मे एम.डी डिग्रीधारी छात्रो की नियुक्ति हुई थी, इनमे आयुर्वेद कॉलेज रीवा के भी एम.डी. करने वाले छात्र है। लेकिन डिग्री को मान्यता नही होने से इनको नौकरी जाने का भय बना हुआ है। यदि डिग्री को कोई अदालत मे चुनौती देता है तो नौकरी में लेने-देने पड सकते है।