सारे देश मे समलैगिकता को कानूनी रुप से हरी झंडी मिलने के साथ ही यह बहस का मुद्दा बना हुआ है। चिकित्सा जगत जहॉ इसे मानसिक विकृति बताता है वहीं ज्योतिषियों के अनुसार यह एक तरह से ग्रह नक्षत्रों की चाल पर जन्मजात आदत होती है। नक्षत्रों का असर बदलते ही समलैगिक मनुष्य सामान्य हो जाता है। समलैगिंता को देश में मान्यता मिलने से कई सारे प्रश्न खडे हो रहे है, वास्तव में ज्योतिष के अनुसार समलैगिकता मानव जीवन में एक दोष है और इसकी उत्पत्ति ग्रह नक्षत्रों से होती है। ज्योतिषों की दलील है कि यह नक्षत्र दोष कुछ राशि मे देखने का मिलता है और नक्षत्र परिवर्तन के साथ ही दूर हो जाता है। कर्क, कन्या, मीन मे देखने का अधिक मिलता है। कन्या का गुरु खराब होने से कन्या-कन्या समलैगिंक हो जाती है। मंगल और शनि खराब होने से पुरुषों मे समलैगिंकता उत्पन्न हो जाती है। लेकिन ग्रह-राशि के बदलने के साथ ही समलैगिक राशियों में आकर्षण कम हो जाता है और व्यभिचार मानव सामान्य जीवन जीने लगता है। भले ही देश में समलैगिकता को मान्यता दे दी गयी हो, लेकिन समाज इसे स्वीकार करने के मूंड में नही दिख रहा है। समलैगिकता को हरी झंडी मिलने से समलैगिंक बेहद खुश नजर आ रहे है। रीवा मे हमने समलैगिक दो लडकियो से बातचीत की.. इन ये दोनो लडकियॉ एक दूसरे से बेपनाह मोहब्वत करती है और इन्हे अलग होने की बात पर जान तक देने का मन बना रखी है। समाज मे हिन्दूओं के साथ ही गैर हिन्दू संगठन भी समलैगिंकता का पुरजोर विरोध कर रहे है। गैर हिन्दू संगठन भी इसे शरिअत के खिलाफ बता रहे है और इसका विरोध कर रहे है। लेकिन वहीं कुछ समाजशास्त्री इस कानून को आबादी के रोकथाम के लिये उपयुक्त मानते है। मगर इस बात से भी इंकार नही करते कि इसके दुष्परिणाम भी समाज को उठाने पडेगें। हमारा देश आदर्श, मूल्यों एवं परम्परावादियों का देश है, इसलिये इसके दूरगामी परिणाम होगे। दो समान लिंग धारी यदि आपस में सम्बन्ध बनाते है चाहे वह अंशकालिक या वैवाहिक हो समलैगिकता है विपरीत लिंग वालों में यह सम्बंध प्राकृतिक माना जाता है, किंतु समान लिंग वालों में यह सम्बन्ध अप्राकृतिक समझा जाता है। मनुष्य भी इसका अपवाद नहीं है मनुष्य में बहुत कम मात्रा में होने के कारण इसे काम विकृति या मनोरोग समझा गया और अपराध माना जाने लगा। कल तक जो अपराध था उसे कानूनी मान्यता मिल जायेगी लेकिन सामाजिक स्वीकारोक्ति मिलें इसके लिए समय लगेगा। रविवार, 9 अगस्त 2009
ग्रह-नक्षत्र की चाल से होती है समलैगिकता
सारे देश मे समलैगिकता को कानूनी रुप से हरी झंडी मिलने के साथ ही यह बहस का मुद्दा बना हुआ है। चिकित्सा जगत जहॉ इसे मानसिक विकृति बताता है वहीं ज्योतिषियों के अनुसार यह एक तरह से ग्रह नक्षत्रों की चाल पर जन्मजात आदत होती है। नक्षत्रों का असर बदलते ही समलैगिक मनुष्य सामान्य हो जाता है। समलैगिंता को देश में मान्यता मिलने से कई सारे प्रश्न खडे हो रहे है, वास्तव में ज्योतिष के अनुसार समलैगिकता मानव जीवन में एक दोष है और इसकी उत्पत्ति ग्रह नक्षत्रों से होती है। ज्योतिषों की दलील है कि यह नक्षत्र दोष कुछ राशि मे देखने का मिलता है और नक्षत्र परिवर्तन के साथ ही दूर हो जाता है। कर्क, कन्या, मीन मे देखने का अधिक मिलता है। कन्या का गुरु खराब होने से कन्या-कन्या समलैगिंक हो जाती है। मंगल और शनि खराब होने से पुरुषों मे समलैगिंकता उत्पन्न हो जाती है। लेकिन ग्रह-राशि के बदलने के साथ ही समलैगिक राशियों में आकर्षण कम हो जाता है और व्यभिचार मानव सामान्य जीवन जीने लगता है। भले ही देश में समलैगिकता को मान्यता दे दी गयी हो, लेकिन समाज इसे स्वीकार करने के मूंड में नही दिख रहा है। समलैगिकता को हरी झंडी मिलने से समलैगिंक बेहद खुश नजर आ रहे है। रीवा मे हमने समलैगिक दो लडकियो से बातचीत की.. इन ये दोनो लडकियॉ एक दूसरे से बेपनाह मोहब्वत करती है और इन्हे अलग होने की बात पर जान तक देने का मन बना रखी है। समाज मे हिन्दूओं के साथ ही गैर हिन्दू संगठन भी समलैगिंकता का पुरजोर विरोध कर रहे है। गैर हिन्दू संगठन भी इसे शरिअत के खिलाफ बता रहे है और इसका विरोध कर रहे है। लेकिन वहीं कुछ समाजशास्त्री इस कानून को आबादी के रोकथाम के लिये उपयुक्त मानते है। मगर इस बात से भी इंकार नही करते कि इसके दुष्परिणाम भी समाज को उठाने पडेगें। हमारा देश आदर्श, मूल्यों एवं परम्परावादियों का देश है, इसलिये इसके दूरगामी परिणाम होगे। दो समान लिंग धारी यदि आपस में सम्बन्ध बनाते है चाहे वह अंशकालिक या वैवाहिक हो समलैगिकता है विपरीत लिंग वालों में यह सम्बंध प्राकृतिक माना जाता है, किंतु समान लिंग वालों में यह सम्बन्ध अप्राकृतिक समझा जाता है। मनुष्य भी इसका अपवाद नहीं है मनुष्य में बहुत कम मात्रा में होने के कारण इसे काम विकृति या मनोरोग समझा गया और अपराध माना जाने लगा। कल तक जो अपराध था उसे कानूनी मान्यता मिल जायेगी लेकिन सामाजिक स्वीकारोक्ति मिलें इसके लिए समय लगेगा।