
रीवा में 12 करोड रुपयें से भी अधिक रायल्टी चोरी के आरोप में ई.ओ.डब्बलू ने तत्कालीन एस.डी.एम., कुलसचिव, खनिज अधिकारी समेत 5 लोगों के खिलाफ एफ.आई.आऱ दर्ज की है। मामले की जॉच पूरी होने तक इस घोटाले में लिप्त और भी वरिष्ट अधिकारियो के बेनकाब होने के कयाश लगाये जा रहे है। रीवा का राष्ट्रीय राजमार्ग क्र.7 बाईपास.. इस सडक निर्माण कार्य के लिये अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय नें लगभग 50 करो़ड की मुरंम पॉथ ओरियंटल हाइवे इंडिया लिमिटेड को कौडियो के दाम बेच दी थी। पॉथ ओरियंटल ने विश्वविद्यालय और प्रशासनिक अधिकारियों से साठगॉठ कर मुरंम को मिट्टी के भाव खरीदा। साथ ही बाईपास से लगे लगभग 5 तालाबों के मुरंम कि खुदाई भी धडल्लें से की। इससे जहॉ तालाब खदानों मे तबदील हो गये वहीं कंपनी ने रायल्टी और परिवहन कर की चोरी भी बेरोक-टोक की। लेकिन प्रशासनिक अधिकारी हॉथ पर हॉथ धरे बैठे रहे। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलसचिव, तत्कालीन एस.डी.एम., राजस्व निरीक्षक, उपयंत्री, पटवारी समेत, पॉथ ओरियंटल के खिलाफ शिकायत आर्थिक अपराध एवं अनवेष्ठ ब्यूरों सुरेन्द्र ने शिकायत दर्ज करायी गयी थी। शासन-प्रशासन की मिली भगत से अकेले पॉथ कम्पनी को फायदा पहुंचाने के लिये मुरंम को मिट्टी बता कर बेचा गया। इसमें अकेले पॉथ ओरियंटल कम्पनी को लगभग 15 करोड का मुनाफा हुआ। अनुबंध मे निर्धारित खदानों से खुदाई ना करके अपने निजी लाभ के लिये अवैधानिक तरीके से विश्वविद्यालय की भूमि पर बने तालाबों के स्वरुप को बिगाड कर बडी-बडी खदानों में तबदील कर दिया गया। आर्थिक अपराध एवं अनवेष्ठ ब्यूरों ने 8 लोगों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज की है। पॉथ कंपनी को जहॉ इस कारनामें में लगभग 15 करोड का फायदा हुआ वहीं विश्वविद्यालय को लगभग 5 करोड रुपय की क्षति हुई। हाईवे बाई पास घोटाले मे लिप्त ज्यादातर अधिकारियो का स्थानांतरण हो चुका है। इनमें एस.डी.एम शिवपाल सिंह, खनिज अधिकारी विनोद बागडे और राजस्व निरीक्षक है। जबकि कुल सचिव परीक्षित सिंह वर्तमान समय में सागर विश्वविद्यालय में पदस्थ है। आर्थिक अपराध ब्यूरों ने भले ही इस घोटाले का पर्दाफास कर मामला दर्ज कर लिया हो, लेकिन इस मामलें से जुडे सफेद पोश अभी भी जॉच के दायरे से कोशो दूर है।