राष्ट्रगान सुनने से हर हिन्दुस्तान मे जोश और जज्बा दिखने लगाता है... देशप्रेम की भावना से प्रेरित रीवा के मूंकबधिर छात्रों नें सांकेतिक राष्ट्रगान को इजात किया है। सांकेतिक शैली से सैकडों मूकबधिर राष्ट्रगान कर देश को सलाम करते है। हिन्दुस्तान की मिट्टी मे इतना जोश और जुनून है कि देश के लिये कुछ भी कर गुजरने की प्रेरणा हर एक देश प्रेमी के दिलो दिमाग मे होती है। इसे जज्बे से लबोरेज इन मूक बधिरों छात्रों ने सांकेतिक शैली से राष्ट्रगान करना सीखा लिया है। हॉथ की उगलियॉ के इसारे से सांकेत कर ये वहीं राष्ट्रगान प्रस्तुति दे रहे है, जो आम इंसान गाकर सुनता है। अब ये अपने आप को किसी से कमजोर नही समझ रहते है। यह करना बेहद कठिन था लेकिन इनकी लगन और प्रवल इच्छा ने यह कर दिखाया। अब ये राष्ट्रगान करने मे पूरी तरह से परगत हासिल कर चुके है। पहले ही अपने आप को समाज की मुख्य धारा से अलग होना महसूस करते थे लेकिन अब ये संकेत के माध्यम से अपनी देश प्रेम की भावना को जन-जन तक पहुचा सकते है। कौन कहता है आसमान मे सुराग हो नही सकता...एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारों। सांकेतिक रुप से राष्ट्रगान कर इन बेजुबानों ने वतन के प्रति अपनी प्रेम दर्शा दिया है। इनसे वतन परस्त देश वासियों को सीख लेनी चाहिये। शनिवार, 15 अगस्त 2009
सांकेतिक राष्ट्रगान
राष्ट्रगान सुनने से हर हिन्दुस्तान मे जोश और जज्बा दिखने लगाता है... देशप्रेम की भावना से प्रेरित रीवा के मूंकबधिर छात्रों नें सांकेतिक राष्ट्रगान को इजात किया है। सांकेतिक शैली से सैकडों मूकबधिर राष्ट्रगान कर देश को सलाम करते है। हिन्दुस्तान की मिट्टी मे इतना जोश और जुनून है कि देश के लिये कुछ भी कर गुजरने की प्रेरणा हर एक देश प्रेमी के दिलो दिमाग मे होती है। इसे जज्बे से लबोरेज इन मूक बधिरों छात्रों ने सांकेतिक शैली से राष्ट्रगान करना सीखा लिया है। हॉथ की उगलियॉ के इसारे से सांकेत कर ये वहीं राष्ट्रगान प्रस्तुति दे रहे है, जो आम इंसान गाकर सुनता है। अब ये अपने आप को किसी से कमजोर नही समझ रहते है। यह करना बेहद कठिन था लेकिन इनकी लगन और प्रवल इच्छा ने यह कर दिखाया। अब ये राष्ट्रगान करने मे पूरी तरह से परगत हासिल कर चुके है। पहले ही अपने आप को समाज की मुख्य धारा से अलग होना महसूस करते थे लेकिन अब ये संकेत के माध्यम से अपनी देश प्रेम की भावना को जन-जन तक पहुचा सकते है। कौन कहता है आसमान मे सुराग हो नही सकता...एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारों। सांकेतिक रुप से राष्ट्रगान कर इन बेजुबानों ने वतन के प्रति अपनी प्रेम दर्शा दिया है। इनसे वतन परस्त देश वासियों को सीख लेनी चाहिये। नदी में ध्वजारोहण
रविवार, 9 अगस्त 2009
नन्हा बाइकर
बीस साल बाद भी नही मिली मान्यता
बीस साल बीत जाने के बाद भी आयुर्वेद महाविद्यालय रीवा में संचालित बी.ए.एम.एस कोर्स को मान्यता नही मिली है। साथ ही पिछले दो वर्षो से एडमीशन भी बंद कर दिया गया है। इससे लाखों रुपये खर्च कर बी.ए.एम.एस. और एम.डी. की डिग्री हासिल करने वाले छात्रों का भविष्य अधर मे लटक गया है। इसी के चलते लामबंद होकर सभी छात्र हडताल पर चले गये है और सरकार को चेताने के लिये सदबुद्धी यज्ञ भी किया। हवन कुंड है सजो-समान और पंडित-पुजारी भी है.. यह देखकर सहज समझा जा सकता है कि यह किसी यज्ञ की तैयारी है। मगर यह किसी धार्मिक अनुष्ठान के लिये यज्ञ नही किया जा रहा है बल्कि डॉक्टर की ड्रिग्री हासिल करने वाले बी.ए.एम.एस. और एम.डी. के छात्र कर रहे है। वर्ष 1987 में शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में बैचलर ऑफ आयुर्वेद मार्डन मेडिसिन एण्ड सर्जरी डिग्री के स्थान पर आयुर्वेदाचार्य (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एण्ड सर्जरी) कोर्स शुरु किया गया। लेकिन सी.सी.आई.एम. ने इसे सेडयूल-2 मे नहीं रखा। जिससे डिग्री धारी छात्र प्रदेश के बाहर किसी भी पद के लिये मान्य नही है। बी.ए.एम.एस. और एम.डी. की डिग्री हासिल करने के बाद भी इन छात्रों को रोजगार नही मिल रहा है। साथ ही कालेज मे एडमीशन भी बंद कर दिया गया है इससे सैकडो छात्रों का भविष्य अधर मे लटक गया है। पिछले दो सालो से मेडिकल छात्रों का शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय मे एडमीशन नही हो रहा है और इस बार भी होने के कोई आसार नजर नही आ रहे है। ऐसे अपने भविष्य से चिंतित मे छात्र लामबंद हो गये है और हर हाल में कॉलेज की मान्यता चाहते है। पिछले एक सप्ताह से इनकी हडताल चल रही है और अब सरकार को बुद्धी दिलाने के लिये यज्ञ भी कर डाला। इस यज्ञ से आयुर्वेद के जनक धनवंतरी भगवान खुश होगे और केन्द्रीय चिकित्सा शिक्षा गुलामनवी आजाद और अनूप मिश्रा को बृद्धी प्रदान करेगें। बी.ए.एम.एस. और एम.डी. की डिग्री हासिल करने के लिये छात्रों ने लाखों रुपये खर्ज किये। लेकिन सी.सी.आई.एम की नही मिली डिग्री को मान्यता और पिछले दो सालो से एडमीशन भी बंद हो गये। कॉलेज प्रबंधन सेन्ट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सी.सी.आई.एम.) के मान्यता की शर्त पूरी नही कर पा रहा है जिसके चलते यह परेशानी खडी हुई है। प्रदेश के पॉच आयुर्वेद कालेजों की मान्यता अधर में लटक गयी है.. इसमें रीवा भी सामिल है। वर्ष 2005 में प्रदेश के विभिन्न आयुर्वेद कॉलेज मे एम.डी डिग्रीधारी छात्रो की नियुक्ति हुई थी, इनमे आयुर्वेद कॉलेज रीवा के भी एम.डी. करने वाले छात्र है। लेकिन डिग्री को मान्यता नही होने से इनको नौकरी जाने का भय बना हुआ है। यदि डिग्री को कोई अदालत मे चुनौती देता है तो नौकरी में लेने-देने पड सकते है। ग्रह-नक्षत्र की चाल से होती है समलैगिकता
सारे देश मे समलैगिकता को कानूनी रुप से हरी झंडी मिलने के साथ ही यह बहस का मुद्दा बना हुआ है। चिकित्सा जगत जहॉ इसे मानसिक विकृति बताता है वहीं ज्योतिषियों के अनुसार यह एक तरह से ग्रह नक्षत्रों की चाल पर जन्मजात आदत होती है। नक्षत्रों का असर बदलते ही समलैगिक मनुष्य सामान्य हो जाता है। समलैगिंता को देश में मान्यता मिलने से कई सारे प्रश्न खडे हो रहे है, वास्तव में ज्योतिष के अनुसार समलैगिकता मानव जीवन में एक दोष है और इसकी उत्पत्ति ग्रह नक्षत्रों से होती है। ज्योतिषों की दलील है कि यह नक्षत्र दोष कुछ राशि मे देखने का मिलता है और नक्षत्र परिवर्तन के साथ ही दूर हो जाता है। कर्क, कन्या, मीन मे देखने का अधिक मिलता है। कन्या का गुरु खराब होने से कन्या-कन्या समलैगिंक हो जाती है। मंगल और शनि खराब होने से पुरुषों मे समलैगिंकता उत्पन्न हो जाती है। लेकिन ग्रह-राशि के बदलने के साथ ही समलैगिक राशियों में आकर्षण कम हो जाता है और व्यभिचार मानव सामान्य जीवन जीने लगता है। भले ही देश में समलैगिकता को मान्यता दे दी गयी हो, लेकिन समाज इसे स्वीकार करने के मूंड में नही दिख रहा है। समलैगिकता को हरी झंडी मिलने से समलैगिंक बेहद खुश नजर आ रहे है। रीवा मे हमने समलैगिक दो लडकियो से बातचीत की.. इन ये दोनो लडकियॉ एक दूसरे से बेपनाह मोहब्वत करती है और इन्हे अलग होने की बात पर जान तक देने का मन बना रखी है। समाज मे हिन्दूओं के साथ ही गैर हिन्दू संगठन भी समलैगिंकता का पुरजोर विरोध कर रहे है। गैर हिन्दू संगठन भी इसे शरिअत के खिलाफ बता रहे है और इसका विरोध कर रहे है। लेकिन वहीं कुछ समाजशास्त्री इस कानून को आबादी के रोकथाम के लिये उपयुक्त मानते है। मगर इस बात से भी इंकार नही करते कि इसके दुष्परिणाम भी समाज को उठाने पडेगें। हमारा देश आदर्श, मूल्यों एवं परम्परावादियों का देश है, इसलिये इसके दूरगामी परिणाम होगे। दो समान लिंग धारी यदि आपस में सम्बन्ध बनाते है चाहे वह अंशकालिक या वैवाहिक हो समलैगिकता है विपरीत लिंग वालों में यह सम्बंध प्राकृतिक माना जाता है, किंतु समान लिंग वालों में यह सम्बन्ध अप्राकृतिक समझा जाता है। मनुष्य भी इसका अपवाद नहीं है मनुष्य में बहुत कम मात्रा में होने के कारण इसे काम विकृति या मनोरोग समझा गया और अपराध माना जाने लगा। कल तक जो अपराध था उसे कानूनी मान्यता मिल जायेगी लेकिन सामाजिक स्वीकारोक्ति मिलें इसके लिए समय लगेगा। 
रीवा, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय नें आधा सैकडा से भी अधिक नाम-गिरामी कॉलेजों की मान्यता समाप्त कर दी है। इन कालेजों मे रीवा, सीधी, सतना, शहडोल, अनूपपुर और उमरिया में चल रहे कम्प्यूटर, लॉ, बी.एड., पैरामेडिकल और शोध संस्थान है। इस कार्यवाही के बाद से निजी महाविद्यालयो में हडकंप और एडमीशन ले चुके हजारों छात्रों का भविष्य भी अधर मे लटक गया है। कभी नकल तो कभी घोटालो के लिये कुख्यात रहने वाला अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय इन दिनों मान्यता को लेकर सुर्खियो में है। विश्वविद्यालय ने कोड 28 का हवाला देते हुये संभागभर के नामी गिरामी 73 कॉलेजों की संबद्धता एक झटके में ही समाप्त कर दी है। रीवा और शहडोल जिले मे कुल 138 महाविद्यालय है और इनमें से एक साथ 73 निजी महाविद्यालयो की मान्यता रद्द होने से हडकंप मच गया है। पिछले कुछ सालों में रीवा-शहडोल संभाग में थोक के भाव कम्प्यूटर, विधि और बी.एड. कालेज खुल गयी थे। ये कॉलेज मनमाफिक फीस छात्रो से वसूलते है लेकिन सुविधा के नाम पर यहॉ ना तो भवन है और ना ही प्राध्यापक। इसी का हवाला देते हुये विश्वविद्यालय ने इन कॉलेजो की मान्यता समाप्त कर दी है। विश्वविद्यालय की इस कार्यवाही ने रीवा-सतना और सीधी जिलें की पहचान बन चुके नामी-गिरामी कॉलेजों की संबद्धत भी समाप्त कर दी है। ये कालेज पिछले कई सालों से शिक्षा जगत मे लोहा मनवा रहे थे। इनमें 1 दर्जन विधि, बी.एड, पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट, नर्सिग, कम्प्यूटर कालेज और दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट है। 10 हजार से भी छात्र कालेज प्रबंधन के मन-माफिक मॉगी गयी रकम चुका कर एडमीशन ले चुके थे। ऐसे मे इन छात्रों का भविष्य अधर मे लटक जायेगा। उच्चशिक्षा विभाग को लम्बे समय से इन निजी महाविद्यालयों की शिकायतें मिल रही थी। लेकिन समय रहते इन्होने कोड 28 का पालन नही किया लिहाजा विभाग ने भी मान्यता रद्द करने की हरी झंडी दिखा दी। लेकिन इन कॉलेजो जो छात्र एडमीशन ले चुके है उन छात्रों को दूसरे कॉलेजो मे एडमीशन लेने का समय मिलेगा। ये छात्र प्राइवेट फर्म भर सकेगें और विश्वविद्यालय की शर्ते पूरे करने पर इनकी मान्यता बहाल हो सकेगी। जिसकी लाठी उसकी भैंस.. यही हाल है अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का। कैम्पस के अंदर ही 2 कमरों मे बी.ए.एल.एल.बी विभाग चल रहा है लेकिन यहॉ प्रशासन की निगाह इस लिये नही गयी कि वह शासकीय है। या फिर दूसरे की गिरेवान दिखने वाले अपनी गिरेवान झांकना नही चाहते। सवाल यह उठता है कि विश्वविद्यालय ने जब इन कॉलेजो को मान्यता दी थी उस समय आखिर शर्तो को क्यो नही देखा।
चरण पादुका पर विवाद, साई भक्त हुये लामबंद
भगवान की चरण पादुका विदेश ले जाने के विरोध में साई भक्त हुये लामबंद। कहा भगवान की आड में लोग घूमना चाहते है विदेश इससे भक्तों मे वृद्दि नही बल्कि भगवान का होगा अपमान। गौरतलब है कि अमेरिका मे बन रहे साई मंदिर के लिये हिन्दुस्तान से चरण पादुका ले जायी जा रही है इसका भक्त विरोध कर रहे है। शिर्डी साईनाथ की चरण पादुका के विदेश ले जाने का उठा विवाद रुकने का नाम नही ले रहा है। रीवा के साई भक्त लामबंद हो गये है और किसी भी हांलत में वे पादुका को विदेश ले जाने की इजाज्त नही देगें। भक्तों की मांने तो साई शिवजी के अवतार है इन्हें प्रचार की आवश्यकता नही है, गौरतलब है कि साई नाथ की चरण पादुका अमेरिका में ले जायी जा रही है। ऐसा मानना है कि इस पादुका के विदेश जाने से साई के भक्तों मे इजाफा होगा। लेकिन साई भक्तो की माने तो इससे इजाफा नही बल्कि उनका अपमान होगा। साई भक्तों का यह भी कहना है कि सुरक्षा के नाम पर पादुको की जॉच पडताल होगी इससे भक्तो की आस्था को आघात पहुचेगें। साई नाथ के इस अपमान को रोकने के लिये भक्त कुछ भी करने के लिये तैयार है किसी भी कीमत मे पादुका को विदेश नही ले जाने दिया देगे। शिर्डी में रखी चरण पादुका से करोडों भक्तों की आस्था जुडी हुई है, लेकिन तलाशी के नाम पर पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के साथ हुये दुर्व्यवहार को हिन्दुस्तानी भूल नही सके है। फिर ये तो चरण पादुका से लोगो की धार्मिक भावनाये और आस्था जुडी है। 12 करोड रुपयें से भी अधिक रायल्टी चोरी
